ग्लोकल यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय “सुदीप्तम् 2025-आयुष ग्लोबल कॉन्क्लेव” का भव्य शुभारंभ
सहारनपुर: ग्लोकल यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय “सुदीप्तम 2025 – आयुष ग्लोबल कॉन्क्लेव” का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह का आरंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें सभी अतिथियों ने सहभागिता की। इसके पश्चात् डॉ. आशी एवं उनकी टीम द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया, जिसने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ. पी. गौरीशंकर (जनरल कन्वीनर, सुदीप्तम 2025 एवं डीन रिसर्च, प्रोफेसर, कायचिकित्सा विभाग, ग्लोकल यूनिवर्सिटी) ने प्रस्तुत किया। ग्लोकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) जॉन फिनबे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आयुष प्रणाली के वैश्विक महत्व और आधुनिक युग में इसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
मुख्य अतिथि डॉ. अतुल बाबू वर्श्नेय (सदस्य, बोर्ड ऑफ आयुर्वेद, एनसीआईएसएम, नई दिल्ली) ने अपने उद्घाटन भाषण में आयुर्वेद के समन्वित विकास और नई पीढ़ी के वैद्यों में अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
“आशीर्वचन” सत्र में सैयद निजामुद्दीन ( अतिरिक्त प्रो-चांसलर, ग्लोकल यूनिवर्सिटी) और प्रो. शिवानी तिवारी ( रजिस्ट्रार, ग्लोकल यूनिवर्सिटी) ने अपने शुभाशीर्वाद दिए।
इसके उपरांत “सम्मान समारोह” में उत्कृष्ट योगदान के लिए विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. अतुल बाबू वर्श्नेय को सम्मान-चिह्न प्रदान किया गया। डॉ. शिशिर प्रसाद को “सुदीप्त वैद्य” सम्मान से अलंकृत किया गया, यह पुरस्कार उन्हें मर्म चिकित्सा में उत्कृष्टता एवं अद्वितीय निपुणता के लिए प्रदान किया गया। साथ ही डॉ. प्रसान्त आर. कृष्णा को आयुर्वेदिक अकादमिक लीडरशिप एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का समापन डॉ. अनुप कुमार के. (प्राचार्य इंचार्ज, ग्लोकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च) के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
पहले दिन के शैक्षणिक सत्रों में प्रख्यात वक्ता ने अपने महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किए-
डॉ. आनंदरामन शर्मा (ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद, नई दिल्ली) ने प्रातः सत्र में अपने गहन विचार साझा किए।
दोपहर के सत्र में डॉ. अजय सादानंदम (केरल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, त्रिशूर, केरल) ने विषयगत प्रस्तुति दी।
शाम के सत्र में डॉ. राजा सिंगला (श्री कृष्ण आयुष यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र) ने अपने ज्ञानवर्धक विचारों से प्रतिभागियों को लाभान्वित किया।
“सुदीप्तम 2025” आयुष चिकित्सा प्रणाली के समग्र विकास, वैश्विक सहयोग और आधुनिक अनुसंधान के संगम का प्रतीक है। इस आयोजन ने आयुर्वेद के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सार्थक कदम प्रस्तुत किया।