स्पेन की बेटी ने भारत को सिखाया सफाई का पाठ और बन गई हिमालय की बेटी
उत्तराखंड अपनी सुन्दरता और साफ़ पर्यावरण के लिए जाना जाता है पर अगर हम आज की बात करे तो क्या उत्तराखंड और पहाड़ उतने ही सुन्दर है जैसे पहले हुआ करते थे। क्या हम किसी जगह घूमने जाते है तो वह की सफाई पर ध्यान देते है? यह सवाल हमारा सबसे पहले खुद से होना चाहिए क्योंकि हमे लगता है यह जिम्मेदारी हमारी नहीं किसी और की है पर किसी ने ऐसा नहीं सोचा।
हिमालय की बेटी बनी स्पेन की जैमा
एक ऐसी ही कहानी हम आपको बताने जा रहे है, जो की हमे प्रेरित करेगी एक नई पहल करने की। यह कहानी है एक ऐसी महिला की जो की भारत की नहीं है बल्कि स्पेन की बेटी है लेकिन दिल से अब वो हिमालय की बेटी बन चुकी है। यह कहानी है स्पेन की महिला जैमा कोलिल की, जो की हिमालय को साफ़ करने के लिए मिसाल बन गई है । जैमा भारत आई थी योग सिखने, ऋषिकेश की शान्ति महसूस करने लेकिन पहाड़ों की हालत ने उन्हें परेशानी में डाल दिया। जहाँ शुद्ध हवा होनी चाहिए थी वहाँ कचरा था, जहाँ प्रकृति की मुस्कुराहट होनी चाहिए थी वहाँ प्लास्टिक रो रही थी। तब ही जैमा ने जीवन को बदलने वाला फैसला लिया और ठान लिया कि पहाड़ों को बचाना है, हिमालय को स्वच्छ बनाना है।
200 किलो से ज्यादा कचरा किया साफ
जैमा अपने साथी मनोज के साथ मिलकर ऐसे इलाको में जाती थी जहा सांस लेना भी मुश्किल होता था और वहाँ 200 किलो से ज्यादा कचरा लादकर नीचे आती थी। उनका यह कार्य किसी तरह का सफाई अभियान नहीं बल्कि आइना है, जो हमें दिखाता है कि हम जिन पहाड़ों की पूजा करते है उन्हें ही गन्दा कर रहे है। जहां हम जाते है इश्वर से मिलने वही छोड़ आते है प्लास्टिक, बोतले और कचरे की परते और दूसरी तरफ एक विदेशी महिला हमें हमारी जिम्मेदारी का एहसास करवा रही है।
जैमा बनी पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक
आज जैमा भारत में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बन चुकी है । वे बताती है कि सेवा की भाषा न धर्म देखती है न देश, बस नियत देखती है। आइये हम सब भी प्रण लें की – प्रकृति बचाएंगे, कचरा नहीं फैलायेंगे, हिमालय को फिर से शुद्ध बनायेंगे। फैसला आपका है कि आपको अपनी जिम्मेदारी को निभाना है या किसी और को सौपकर यहा से चले जाना है या फिर दो शब्द सरकार को, दो शब्द सफाई कर्मचारी को कहकर खुद को तसल्ली देनी है।
जैमा अपने काम से हमें ये बताती है की “हिमालय हमारा है, तो जिम्मेदारी भी हमारी होनी चाहिए। पर्वतों को पवित्र मानते हो, तो उन्हें गन्दा मत करो।