हिमाचल प्रदेश

रक्षाबंधन पर चांदी की राखियों का बढ़ा क्रेज

शिमला : रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही शिमला के बाजार राखियों की रंग-बिरंगी रौनक से सज गए हैं। भाई की कलाई पर प्यार और अपनापन बांधने के लिए बहनें इस बार सिर्फ पारंपरिक राखियां ही नहीं, बल्कि चांदी से बनी राखियां भी खूब पसंद कर रही हैं। आभूषणों की दुकानों पर चांदी की राखियां खरीदने के लिए ग्राहकों की संख्या बढ़ी है।

रक्षाबंधन पर चांदी की राखियों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन राखियों में चांदी की डोरी और आकर्षक डिजाइन के साथ कई तरह की कलाकारी देखने को मिल रही है। कुछ राखियां बेहद साधारण हैं तो कुछ में बारीक नक्काशी और आकर्षक आकृतियां बनाई गई हैं। ज्वेलर्स के अनुसार, ग्राहक ऐसी राखियों को सिर्फ त्योहार पर बांधने के लिए नहीं, बल्कि यादगार के तौर पर लंबे समय तक संभालकर रखने के लिए भी खरीद रहे हैं।बाजार में बच्चों के लिए भी चांदी की राखियों की बड़ी रेंज उपलब्ध है। छोटे भाई की पसंद को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों ने कई आकर्षक डिजाइन उतारे हैं। इनमें मिकी माउस, स्पाइडर-मैन, मोटरसाइकिल और टॉम एंड जैरी जैसे कार्टून और कैरेक्टर डिजाइन वाली राखियां बच्चों को आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा भगवान की मूर्तियों के आकार वाली चांदी की राखियां भी बाजार में उपलब्ध हैं। चांदी की राखियों की कीमत मुख्य रूप से उसमें इस्तेमाल चांदी की मात्रा और डिजाइन की बारीकी के आधार पर तय होती है।

चांदी की राखियों में ग्राहकों के बजट के हिसाब से कई विकल्प उपलब्ध हैं। साधारण डिजाइन की राखियां करीब 450 रुपये से मिल रही हैं। वहीं ज्यादा चांदी और आकर्षक डिजाइन वाली राखियों की कीमत 8,000 रुपये तक पहुंच रही है। ज्वेलर्स के मुताबिक ग्राहक अपनी पसंद और बजट के हिसाब से राखी चुन रहे हैं। खासकर बच्चों के लिए डिजाइन वाली राखियों को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है।

रक्षाबंधन पर बहनों की खरीदारी सिर्फ राखियों तक सीमित नहीं है। भाई के लिए चांदी के ब्रेसलेट भी खरीदे जा रहे हैं। इनकी कीमत करीब 10 हजार रुपये से शुरू होकर इससे अधिक तक जा रही है। चांदी के ब्रेसलेट और राखियां उन परिवारों में खास पसंद की जा रही हैं, जो रक्षाबंधन पर भाई को ऐसा उपहार देना चाहते हैं जिसे त्योहार के बाद भी लंबे समय तक इस्तेमाल या संभालकर रखा जा सके।

टांगरी ज्वेलर्स के मिडल बाजार स्थित चांदी के आभूषणों की दुकान की कर्मचारी सीमा और पायल ने बताया कि चांदी की राखियों की मांग बनी हुई है। अलग-अलग डिजाइन की राखियां ग्राहक खरीद रहे हैं और बच्चों के लिए बनी डिजाइन वाली राखियां विशेष रूप से पसंद की जा रही हैं। टांगरी ज्वेलर्स के मालिक अविनाश टांगरी के अनुसार चांदी की राखियों की मांग अधिक है। सोने की राखियां भी उपलब्ध हैं, लेकिन चांदी की तुलना में इनकी मांग कम है। उन्होंने बताया कि लोग सोने-चांदी की राखियों को त्योहार के बाद भी यादगार के रूप में संभालकर रखते हैं, जिससे इनका चलन बढ़ रहा है। लालजी ज्वैलर्स, लोअर बाजार के मालिक अक्षय लालजी ने बताया कि ग्राहक चांदी की राखियां खरीदने पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार रोजाना करीब सात से आठ चांदी की राखियां बिक रही हैं और इनकी कीमत 450 रुपये से शुरू होती है।

बाजार में साधारण राखियों की शुरुआत जहां करीब 10 रुपये से हो रही है, वहीं आकर्षक डिजाइन वाली राखियां 250 से 300 रुपये तक उपलब्ध हैं। दूसरी ओर, चांदी की राखियों की कीमत करीब 450 रुपये से शुरू होकर 8,000 रुपये तक पहुंच रही है।
रक्षाबंधन की राखी अब सिर्फ भाई की कलाई पर बांधी जाने वाली डोरी तक सीमित नहीं रह गई है। बाजार में बदलती पसंद के साथ राखियों में भी लगातार नए प्रयोग हो रहे हैं। जहां बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर और खिलौनों से प्रेरित डिजाइन पसंद किए जा रहे हैं, वहीं बड़े भाई-बहनों के बीच चांदी की राखियों का चलन बढ़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि चांदी की राखी को त्योहार के बाद भी एक यादगार वस्तु के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है।

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