Bihar : स्वाइन फ्लू (एच1एन1) ने बिहार में दस्तक दे दी है। राजधानी पटना में जांच के दौरान दो मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें एक मरीज कंकड़बाग और दूसरा अगमकुआं इलाके का रहने वाला है। दर्जनों संदिग्ध मरीजों की जांच कराई गई थी, जिसमें दो लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। हालांकि पटना के अलावा राज्य के अन्य जिलों में अभी स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारी अधूरी नजर आ रही है।
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार और स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर है। वहीं बिहार के सरकारी अस्पतालों की पड़ताल में सामने आया है कि कई जगहों पर अभी तक न तो अलग आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है और न ही एंटी वायरल दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दो दिन पहले पटना में स्वाइन फ्लू को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई है। जल्द ही एडवाइजरी जारी होने के बाद सभी अस्पतालों में जरूरी तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी।
गयाजी के जय प्रकाश नारायण अस्पताल में पड़ताल के दौरान पता चला कि स्वाइन फ्लू को लेकर अभी तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जैसे ही दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, संभावित मरीजों के लिए अलग आइसोलेशन वार्ड बनाया जाएगा और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल अस्पताल में सामान्य वायरल बुखार और अन्य बीमारियों के मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है।
जय प्रकाश नारायण अस्पताल के चिकित्सक डॉ. हेमंत कुमार ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 200 मरीज पहुंच रहे हैं। मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। आने वाले मरीजों में करीब 40 प्रतिशत मरीज वायरल फीवर से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि सिर दर्द, तेज बुखार, खांसी, ठंड लगना और शरीर में दर्द जैसे लक्षण कई वायरल संक्रमणों में सामान्य होते हैं।
केवल इन लक्षणों के आधार पर स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए एच1एन1 की जांच जरूरी होती है। वर्तमान में अधिकांश मरीज पांच से छह दिनों में ठीक हो रहे हैं। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. संजय कुमार सिंह ने बताया कि अभी तक बिहार स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू को लेकर कोई आधिकारिक एडवाइजरी प्राप्त नहीं हुई है। पटना में हुई बैठक के बाद जल्द ही दिशा-निर्देश मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के संबंधित विभागों को सतर्क रहने को कहा गया है। निर्देश मिलते ही स्वाइन फ्लू के संभावित मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार किया जाएगा और एंटी वायरल दवाओं का स्टॉक भी उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. संजय कुमार सिंह के अनुसार जय प्रकाश नारायण अस्पताल में अभी तक स्वाइन फ्लू का कोई संदिग्ध मरीज सामने नहीं आया है। सामान्य फ्लू और वायरल संक्रमण के मरीज ही इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। निमोनिया या सांस लेने में गंभीर परेशानी वाले मरीजों की संख्या में भी फिलहाल कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूरी है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचना, नियमित रूप से हाथ धोना, साफ-सफाई रखना और खांसते या छींकते समय मुंह ढंकना संक्रमण से बचाव के अहम उपाय हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।